आओ मिलकर एक सुनहरा भारत बनाएं गौरी (बेटी), गाय और गंगा को बचाएं
शुद्ध देसी गिर गाय का घी - 500 ग्राम
शुद्ध गौमूत्र अर्क - 500 मि.ली.
देसी गाय के गोबर से बनी धूप एवं उपले
दाती महाराज के 77 वां जन्मोत्सव एवं 30 वां दाती कन्या भ्रूण सरंक्षण दिवस पर संतों की गौ-महाकुंभ, गौ-संवर्धन, दाती कन्या भ्रूण संरक्षण और इष्ट-पूजा के जनजागरण का हजारों साधू-संतो लिया संकल्प श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और गौ-संरक्षण अभियान के लिए दिए 5.11 लाख, देशभर से जुटे हजारों संतों ने समाज जागरण का किया आह्वान
नई दिल्ली। गोपाष्टमी का सनातन धर्म में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह त्योहार मुख्य रूप से गौ माता और भगवान कृष्ण के प्रति श्रद्धा और भक्ति को समर्पित है। गोपाष्टमी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन गौ माता और भगवान कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन भगवान कृष्ण द्वारा गौ चराने की शुरुआत की गई थी। इस अवसर पर शनिवार को सिद्ध शक्तिपीठ शनिधाम में धूमधाम –असोला, फतेहपुर बेरी स्थित शनिधाम गौशाला में गोपाष्टमी का धूमधाम से इस महापर्व को मनाया गया।
Submitted by Shanidham Gaushala on 29 May, 2020
हिंदू धर्म में गाय को माता कहा गया है। पुराणों में धर्म को भी गौ रूप में दर्शाया गया है। भगवान श्रीकृष्ण गाय की सेवा अपने हाथों से करते थे और इनका निवास भी गोलोक बताया गया है। इतना ही नहीं गाय को कामधेनु के रूप में सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला भी बताया गया है। हिंदू धर्म में गाय के इस महत्व के पीछे कई कारण हैं जिनका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है।
Submitted by Shanidham Gaushala on 07 Jul, 2019
महाभारत में गौमाता का माहात्म्य, तथा गौमाता के दैनिक जाप, प्रार्थना तथा प्रणाम के मंत्र भगवान् श्री राम के गुरुदेव महर्षि वसिष्ठ जी इक्ष्वाकुवंशी महाराजा सौदास से “गवोपनिषद्” (गौओं की महिमा के गूढ रहस्य को प्रकट करने वाली विद्या) का निरूपण करते हुए महाभारत में कहते हैं
Submitted by Shanidham Gaushala on 29 Mar, 2019
शास्त्रों में ऋषियों-महर्षियों ने गौ की अनंत महिमा लिखी है। उनके दूध, दही़, मक्खन, घी, छाछ, मूत्र आदि से अनेक रोग दूर होते हैं। गौमूत्र एक महौषधि है। हिंदू धर्म के अनेक ग्रंथों में गौमूत्र से मिलने वाले फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है. यहां तक कि वैज्ञानिकों ने भी गौमूत्र को कीटाणुनाशक और शरीर की कई बीमारियों को दूर करने में सहायक माना है. गोमूत्र में कार्बोलिक एसिड, यूरिया, फास्फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम और सोडियम होता है यानि शरीर की बीमारियों को ठीक करने के लिए जितने तत्वों की जरूरत होती है इसलिए इसे औषधीय गुणों की दृष्टि से महौषधि माना गया है। जानिए विभिन्न रोगों में गौमूत्र के लाभ -
यज्ञ में सोम की चर्चा है जो कपिला गाय के दूध से ही तैयार किया जाता था। इसीलिए महाभारत के अनुशासन पर्व में गौमाता के विषय में विशेष चर्चाऐं हैं। गाय सभी प्राणियों में प्रतिष्ठत है, गाय महान उपास्य है। गाय स्वयं लक्ष्मी है, गायों की सेवा कभी निष्फल नहीं होती।
मित्रो! यज्ञ में प्रयुक्त होने वाले शब्द जिनसे देवताओं व पितरों को हवन सामग्री प्रदान की जाती है, वे स्वाहा व षट्कार गौमाता में स्थायी रूप से स्थित हैं। स्पष्ट है, यज्ञ स्थल गाय के गोबर से लीपकर पवित्र होता है। गाय के दूध, दही, घृत, गोमूत्र और गोबर से बने हुए पंचगव्य से स्थल को पवित्र करते हैं।
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