आओ मिलकर एक सुनहरा भारत बनाएं गौरी (बेटी), गाय और गंगा को बचाएं

दाती महाराज के 77 वां जन्मोत्सव एवं  30 वां दाती कन्या भ्रूण सरंक्षण दिवस  पर संतों की गौ-महाकुंभ, गौ-संवर्धन, दाती कन्या भ्रूण संरक्षण और इष्ट-पूजा के जनजागरण का हजारों साधू-संतो लिया संकल्प

दाती महाराज के 77 वां जन्मोत्सव एवं 30 वां दाती कन्या भ्रूण सरंक्षण दिवस पर संतों की गौ-महाकुंभ, गौ-संवर्धन, दाती कन्या भ्रूण संरक्षण और इष्ट-पूजा के जनजागरण का हजारों साधू-संतो लिया संकल्प

दाती महाराज के 77 वां जन्मोत्सव एवं 30 वां दाती कन्या भ्रूण सरंक्षण दिवस पर संतों की गौ-महाकुंभ, गौ-संवर्धन, दाती कन्या भ्रूण संरक्षण और इष्ट-पूजा के जनजागरण का हजारों साधू-संतो लिया संकल्प श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और गौ-संरक्षण अभियान के लिए दिए 5.11 लाख, देशभर से जुटे हजारों संतों ने समाज जागरण का किया आह्वान


शनिधाम गौशाला में धूमधाम से मनाया गया गोपाष्टमी का महापर्व

शनिधाम गौशाला में धूमधाम से मनाया गया गोपाष्टमी का महापर्व

नई दिल्ली। गोपाष्टमी का सनातन धर्म में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह त्योहार मुख्य रूप से गौ माता और भगवान कृष्ण के प्रति श्रद्धा और भक्ति को समर्पित है। गोपाष्टमी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन गौ माता और भगवान कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन भगवान कृष्ण द्वारा गौ चराने की शुरुआत की गई थी। इस अवसर पर शनिवार को सिद्ध शक्तिपीठ शनिधाम में धूमधाम –असोला, फतेहपुर बेरी स्थित शनिधाम गौशाला में गोपाष्टमी का धूमधाम से इस महापर्व को मनाया गया।


गोपाष्टमी का महापर्व पुजा-अर्चना कर श्रद्धा से मनाया गया

गोपाष्टमी का महापर्व पुजा-अर्चना कर श्रद्धा से मनाया गया

सोडावास, पाली के निकटवर्ती ग्राम सोडावास में सोडावास श्री शनिधाम गौशाला में गौमाताओं की पुजा-अर्चना कर श्रद्धा से मनाया गया गोपाष्टमी का महापर्व गौमाताओं को श्रीमहंत श्रद्धापुरी जी महाराज ने चन्दन रौली का टिका, चुंदरी ओड़ाकर गुड लापसी का भोग लगवाकर सुख समृद्धि की कामना की गई


भारतीय नस्ल के 20 सर्वाधिक लोकप्रिय गौवंश है | ओंगोली नस्ल की गाय के बारें में जानते है |

Submitted by Shanidham Gaushala on 07 Jul, 2019

भारतीय नस्ल के 20 सर्वाधिक लोकप्रिय गौवंश भारत में गाय को देवी का दर्जा प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवताओं का निवास है। गौवंश का यूं तो पूरी दुनिया में ही काफी महत्व है, लेकिन भारत के संदर्भ में बात की जाए तो प्राचीन काल से यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। चाहे वह दूध का मामला हो या फिर खेती के काम में आने वाले बैलों का। प्राचीन भारत में गौवंश समृद्धि का प्रतीक मानी जाती थी। युद्ध के दौरान स्वर्ण, आभूषणों के साथ गायों को भी लूट लिया जाता था। जिस राज्य में जितनी गौवंश होती थीं उसको उतना ही सम्पन्न माना जाता है। गाय का दूध बहुत ही पौष्टिक होता है। यह बीमारों और बच्चों के लिए बेहद उपयोगी आहार माना जाता है। दूध से दही, पनीर, मक्खन और घी भी बनाता है। गाय का घी और गौमूत्र अनेक आयुर्वेदिक औषधियां बनाने के काम भी काम आता है। गौवंश का गोबर फसलों के लिए सबसे उत्तम खाद है।


Read More 824 reads

भारतीय नस्ल के 20 सर्वाधिक लोकप्रिय गौवंश है | निमाड़ीनस्ल की गाय के बारें में जानते है |

Submitted by Shanidham Gaushala on 07 Jul, 2019

12. निमाड़ी मध्य प्रदेश के नर्मदा की घाटियों में पायी जाने वाली निमाड़ी प्रजाति की गौवंश का रूपरंग मूलतः गिर और खल्लारी से मेल खाता है। इसपर भूरापन लिए हुए लाल रंग के साथ जगह-जगह बड़े सफेद धब्बे होते हैं। यह दिखने में तांबे के रंग का होता है। इस प्रजाति का गौवंश काफी फूर्तिले होते हैं। अगर इनकी अच्छी देखभाल की जाए तो ये काफी दूध देते हैं। सिंग पीछे की ओर झुके हुए और पूंछ काली एवं साफ होती हैं। इस प्रजाति की अच्छी देखभाल करें, तो पर्याप्त मात्रा में दूध प्राप्त होता है।


Read More 885 reads

घाणेराव में आयोजित समारोह में 225 गौ सेवको, लंपि वॉरियस को महामंडलेश्वर दाती महाराज ने किया सम्मानित

Submitted by Shanidham Gaushala on 19 Dec, 2022

घाणेराव 17 नवबर। स्थानीय कस्बे में श्री शनिदेव सेवा समिति घाणेराव के तत्वाधान में आयोजित स्वामी परमहंस निजस्वरूपानंद दाती महाराज के सानिध्य में श्री गौ सेवा रत्न सम्मान समारोह ओर कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें 225 लंपि वॉरियस को गौ सेवा रत्न से समानित किया गया।


Read More 1,403 reads

More Blogs

पशु , पक्षी, पर्यावरण एवं प्राणी संरक्षण केंद्र

यज्ञ में सोम की चर्चा है जो कपिला गाय के दूध से ही तैयार किया जाता था। इसीलिए महाभारत के अनुशासन पर्व में गौमाता के विषय में विशेष चर्चाऐं हैं। गाय सभी प्राणियों में प्रतिष्ठत है, गाय महान उपास्य है। गाय स्वयं लक्ष्मी है, गायों की सेवा कभी निष्फल नहीं होती।

मित्रो! यज्ञ में प्रयुक्त होने वाले शब्द जिनसे देवताओं व पितरों को हवन सामग्री प्रदान की जाती है, वे स्वाहा व षट्कार गौमाता में स्थायी रूप से स्थित हैं। स्पष्ट है, यज्ञ स्थल गाय के गोबर से लीपकर पवित्र होता है। गाय के दूध, दही, घृत, गोमूत्र और गोबर से बने हुए पंचगव्य से स्थल को पवित्र करते हैं।

Read More

Shanidham Gaushala Gallery
Shanidham Gaushala Gallery
Shanidham Gaushala Gallery
Shanidham Gaushala Gallery